केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 26 अक्टूबर को अपनी नीदरलैंड यात्रा के दौरान डच सरकार के नेताओं, सांसदों और बड़ी डच कंपनियों के प्रतिनिधियों से कई बैठकें कीं। वाणिज्य मंत्रालय की विज्ञप्ति के अनुसार इनका मक़सद व्यापार और निवेश बढ़ाना और भारतीय व डच कंपनियों के बीच सहयोग के नए मौके तलाशना था।

किन-किन से मिले

  • स्जोर्ड स्जोर्ड्स्मा, नीदरलैंड के विदेश व्यापार एवं विकास सहयोग मंत्री।
  • हीलीन हर्बर्ट, आर्थिक मामलों एवं जलवायु मंत्री।
  • आर्थर वान डाइक, नॉर्थ हॉलैंड प्रांत के किंग्स कमिश्नर।
  • डच संसद के हाउस ऑफ रिप्रेज़ेंटेटिव्स की विदेश व्यापार समिति और सीनेट की यूरोपीय मामलों की समिति के सदस्य।

बिज़नेस फोरम में एफटीए पर ज़ोर

दिन का सबसे अहम कार्यक्रम भारत-नीदरलैंड बिज़नेस फोरम रहा, जिसकी सह-अध्यक्षता गोयल और डच मंत्री स्जोर्ड्स्मा ने की। इसमें दोनों देशों के कारोबार जगत के करीब 200 लोग शामिल हुए।

फोरम में भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते से मिलने वाले मौकों पर चर्चा हुई: द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाना, निवेश साझेदारी मज़बूत करना और बाज़ार तक पहुंच बढ़ाना। मंत्रालय के अनुसार इस बात पर ज़ोर दिया गया कि एफटीए के अवसरों को ठोस कारोबारी साझेदारियों, निवेश और भारत-यूरोप आपूर्ति श्रृंखलाओं में बदलने के लिए उद्योगों के बीच क़रीबी सहयोग ज़रूरी है।

कंपनियों के प्रमुखों से मुलाक़ात

गोयल ने कई प्रमुख डच कंपनियों के सीईओ से अलग-अलग बैठकें कीं। ये कंपनियां सेमीकंडक्टर तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक्स, लॉजिस्टिक्स, ऊर्जा और औद्योगिक समाधान, तकनीक और रिटेल जैसे क्षेत्रों से थीं। विज्ञप्ति में कंपनियों के नाम नहीं बताए गए हैं।

उन्होंने हेग स्थित भारतीय दूतावास और एचएसबीसी नीदरलैंड्स की ओर से आयोजित एक राउंडटेबल में 15 डच कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों से भी बात की।

पृष्ठभूमि

मीडिया से बातचीत में गोयल ने कहा कि दोनों देशों के रिश्तों को रणनीतिक साझेदारी का दर्जा मिलने और भारत-यूरोपीय संघ एफटीए के संपन्न होने के बाद भारत-नीदरलैंड आर्थिक संबंधों में तेज़ी आई है। उन्होंने नीदरलैंड को यूरोपीय बाज़ारों तक पहुंच का अहम प्रवेश द्वार बताया।

विज्ञप्ति में किसी नए समझौते या निवेश की घोषणा का ज़िक्र नहीं है।