केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 27 अक्टूबर को गोवा में ओएनजीसी उन्नत प्रशिक्षण संस्थान में 29वीं ऊर्जा प्रौद्योगिकी बैठक (ईटीएम 2026) का उद्घाटन किया। मंत्रालय की विज्ञप्ति के अनुसार तीन दिन की इस बैठक का विषय है 'ऊर्जा नवाचार में तेज़ी: अनुसंधान से व्यावसायीकरण तक'।
सबसे बड़ा एलान: नया शोध केंद्र
बैठक में घोषणा की गई कि विस्तृत विचार-विमर्श के बाद तेल और गैस के अनुसंधान एवं विकास के लिए एक राष्ट्रीय रूपरेखा बनाई जाएगी। इसे लागू करने के लिए सरकार राष्ट्रीय हाइड्रोकार्बन प्रौद्योगिकी केंद्र (एनएचटीएच) बना रही है।
- एनएचटीएच मौजूदा सेंटर फ़ॉर हाई टेक्नोलॉजी (सीएचटी) को अपने में मिला लेगा।
- इसमें सरकारी कंपनियां, निजी क्षेत्र के शोध विभाग, स्टार्टअप, एमएसएमई, शिक्षा संस्थान और शोध संस्थान साझा राष्ट्रीय प्राथमिकताओं पर साथ काम करेंगे।
- मक़सद है दोहराव कम करना और देसी तकनीकों के विकास और इस्तेमाल में तेज़ी लाना।
संकट के दौरान ईंधन आपूर्ति पर पुरी
एक अनौपचारिक बातचीत में पुरी ने बताया कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में आई रुकावटों के दौरान भारत ने उपभोक्ताओं को संकट के पूरे असर से कैसे बचाया। उन्होंने कहा कि घरेलू ज़रूरतें पूरी करने के लिए एलपीजी उत्पादन काफ़ी बढ़ाया गया और तेल विपणन कंपनियों ने पश्चिम एशिया संकट के दौरान रिफ़ाइनरियों, आपूर्ति नेटवर्क और वितरण के बीच तालमेल रखकर ईंधन की आपूर्ति जारी रखी।
विज्ञप्ति के अनुसार पुरी ने कहा कि देश में एक लाख से ज़्यादा रिटेल आउटलेट हैं, लेकिन यह सुनिश्चित किया गया कि एक भी आउटलेट पर ईंधन ख़त्म न हो। उन्होंने यह भी कहा कि ऊर्जा स्रोत चुनने के भारत के फ़ैसले उसके राष्ट्रीय हितों और ज़रूरतों से तय होते हैं।
बायोगैस और अपतटीय खोज
उद्घाटन कार्यक्रम में दो सरकारी योजनाओं का ज़िक्र हुआ:
- गोबरधन (राष्ट्रीय सर्कुलर बायोएनर्जी योजना): 2026-27 से 2035-36 तक के लिए ₹23,731 करोड़, कंप्रेस्ड बायोगैस का उत्पादन बढ़ाने के लिए।
- समुद्र मंथन (राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना): 2030-31 तक ₹84,084 करोड़, गहरे और अति-गहरे समुद्र में तेल-गैस की खोज के लिए।
पुरी ने कृषि अवशेष और जैविक कचरे से बनने वाली कंप्रेस्ड बायोगैस, सस्टेनेबल एविएशन फ़्यूल और अगली पीढ़ी के जैव-ईंधनों के अवसरों पर भी बात की।
बैठक के बारे में
- आयोजक: सेंटर फ़ॉर हाई टेक्नोलॉजी, सह-आयोजक हिंदुस्तान पेट्रोलियम (एचपीसीएल)।
- आकार: 2,500 से ज़्यादा प्रतिनिधि, 250 से ज़्यादा वक्ता, 44 तकनीकी सत्र और 220 से ज़्यादा प्रदर्शनी स्टॉल; मंत्रालय के अनुसार यह अब तक का सबसे बड़ा ईटीएम है।
- विषय: ग्रीन हाइड्रोजन, सस्टेनेबल एविएशन फ़्यूल, कार्बन कैप्चर, कच्चे तेल से रसायन, जैव-ईंधन, रिफ़ाइनिंग तकनीक और डिजिटलीकरण।
