गांधी जयंती के दिन देश में खादी और ग्रामोद्योग उत्पादों की बिक्री एक ही दिन में ₹28 करोड़ से ज़्यादा रही। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 25 अक्टूबर को अपने रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' की 139वीं कड़ी में यह जानकारी दी और लोगों से आग्रह किया कि आने वाले त्योहारों में स्थानीय कारीगरों के बनाए उत्पादों को प्राथमिकता दें। यह जानकारी सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय की एक विज्ञप्ति में दी गई है।

इस कड़ी के साथ 'मन की बात' के 12 साल पूरे हुए। कार्यक्रम की शुरुआत 3 अक्टूबर 2014 को विजयादशमी के अवसर पर हुई थी।

12 साल, खादी की बार-बार अपील

खादी इस कार्यक्रम का बार-बार आने वाला विषय रहा है। खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) के अनुसार हर अपील के बाद बिक्री में उछाल आया:

  • 3 अक्टूबर 2014: पहली कड़ी में कम से कम एक खादी उत्पाद खरीदने की अपील के अगले दिन केवीआईसी के प्रमुख आउटलेट पर रिकॉर्ड बिक्री हुई।
  • 2 अक्टूबर 2022: दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित खादी भवन में ₹1.34 करोड़ की रिकॉर्ड बिक्री हुई।
  • 2 अक्टूबर 2023: उसी खादी भवन में बिक्री ₹1.52 करोड़ से ज़्यादा रही।
  • 28 सितंबर 2025: 126वीं कड़ी में प्रधानमंत्री ने 2 अक्टूबर को कम से कम एक खादी उत्पाद खरीदने की अपील की।
  • 25 अक्टूबर 2026: ताज़ा कड़ी में गांधी जयंती पर ₹28 करोड़ से ज़्यादा की बिक्री का ज़िक्र हुआ। विज्ञप्ति यह नहीं बताती कि यह आंकड़ा देशभर के सभी आउटलेट का है या कुछ चुनिंदा दुकानों का।

कितना बड़ा है यह क्षेत्र

केवीआईसी के अध्यक्ष मनोज गोयल ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में खादी और ग्रामोद्योग क्षेत्र का कारोबार ₹1.87 लाख करोड़ से ज़्यादा रहा और इससे 2.04 करोड़ से अधिक लोगों को रोज़गार मिला। उन्होंने भरोसा जताया कि यह क्षेत्र जल्द ही ₹2.51 लाख करोड़ के अपने कारोबार लक्ष्य तक पहुंच जाएगा। ये आंकड़े केवीआईसी के अपने हैं।

गोयल ने खादी कारीगरों की ओर से प्रधानमंत्री का आभार जताया। उन्होंने कहा, "गांधी जयंती पर एक ही दिन में 28 करोड़ रुपये से अधिक की बिक्री पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने लाखों खादी कारीगरों विशेष रूप से महिला कारीगरों का मनोबल बढ़ाया है।" उन्होंने कहा कि केवीआईसी गुणवत्ता, नवाचार और युवा पीढ़ी को जोड़ने पर ध्यान देगा।

यह क्यों अहम है

त्योहारों का मौसम खादी और हाथ से बने सामान की बिक्री का सबसे बड़ा समय होता है। बड़े त्योहारों से ठीक पहले की गई प्रधानमंत्री की यह अपील उस ख़र्च का एक हिस्सा ग्रामीण कारीगरों और बुनकरों तक पहुंचाने की कोशिश है।