ग्रामीण विकास मंत्रालय ने वीबी-जी राम जी शिकायत निवारण नियम, 2026 अधिसूचित किए हैं, पत्र सूचना कार्यालय की विज्ञप्ति में बताया गया। इन नियमों में मनरेगा की जगह आए ग्रामीण रोज़गार क़ानून से जुड़ी शिकायतों के निपटारे की समय-सीमा तय की गई है।

राज्य सरकारें ग्राम पंचायत, ब्लॉक और ज़िला स्तर पर यह व्यवस्था बनाएंगी। नामित शिकायत निवारण अधिकारी शिकायतें प्राप्त करने, उनका पंजीकरण करने, जांच करने और निपटारा करने के लिए ज़िम्मेदार होंगे। ज़िला स्तर पर इसकी निगरानी ज़िला कार्यक्रम समन्वयक करेंगे।

शिकायत कैसे करें

योजना के क्रियान्वयन से जुड़े किसी भी मामले में कोई भी व्यक्ति इन माध्यमों से शिकायत कर सकता है:

  • नामित अधिकारी के समक्ष व्यक्तिगत रूप से
  • डिलीवरी के प्रमाण के साथ स्पीड पोस्ट से
  • केंद्र सरकार के निर्धारित डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर
  • टेलीफ़ोन, निर्धारित हेल्पलाइन या राज्य सरकार के तय किसी अन्य माध्यम से

काग़ज़ पर मिली शिकायत को उसी दिन डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर दर्ज करना होगा। ऐसा संभव न हो तो अगले कार्य दिवस तक पंजीकरण अनिवार्य होगा। शिकायतकर्ता को पंजीकरण संख्या, तारीख़ और अधिकारी के पदनाम वाली पावती मिलेगी।

विज्ञप्ति के अनुसार, प्रारूप, भाषा, प्रस्तुत करने के तरीके या किसी प्रक्रियागत कमी के आधार पर शिकायत का पंजीकरण करने से इनकार नहीं किया जा सकेगा।

समय-सीमा

जांच शिकायत मिलने के सात कार्य दिवस के भीतर पूरी करनी होगी और समाधान 15 दिन के भीतर करना होगा। ज़रूरत पड़ने पर शिकायतकर्ता को व्यक्तिगत रूप से या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अपना पक्ष रखने का मौक़ा मिलेगा।

15 दिन में हल न होने वाली शिकायत अगले उच्च स्तर पर भेजी जाएगी और उसकी इलेक्ट्रॉनिक निगरानी जारी रहेगी। अपील अधिनियम की अनुसूची I के अनुसार दायर और निपटाई जाएगी।

क्यों अहम है

ये नियम उस क़ानून की एक अहम कड़ी हैं जो अभी लागू होने की प्रक्रिया में है। Rural Voice के अनुसार, यह अधिनियम 1 जुलाई 2026 से लागू हुआ, जिससे मनरेगा निरस्त हो गया और प्रति परिवार गारंटी 125 दिन के मज़दूरी रोज़गार की हो गई। मई में अधिनियम अधिसूचित होने के समय मंत्रालय जिन नियमों का मसौदा तैयार कर रहा था, उनमें शिकायत निवारण नियम भी शामिल थे।

शिकायत व्यवस्था इसलिए भी मायने रखती है क्योंकि यह बदलाव विवादों में रहा है। Outlook के अनुसार, नए क़ानून में 60 दिन की मौसमी रोक और अनिवार्य ई-केवाईसी भी है, और राज्यों व कार्यकर्ताओं ने इसके वित्त पोषण मॉडल पर सवाल उठाए हैं।

Rural Voice के अनुसार, ई-केवाईसी लंबित होने भर से किसी मज़दूर को रोज़गार से वंचित नहीं किया जा सकता। अब देखना होगा कि राज्य कितनी जल्दी अधिकारियों और व्यवस्था को तैयार करते हैं। विज्ञप्ति में इसकी कोई तारीख़ नहीं दी गई है।