केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) ने लगातार 12 महीने तक किसी भी अभियान में अपना एक भी जवान या अधिकारी नहीं गंवाया है। इंडिया टीवी के मुताबिक, सीआरपीएफ महानिदेशक जी.पी. सिंह ने बताया कि 47 साल में पहली बार ऐसा हुआ है। बल का आखिरी ऑपरेशनल नुकसान 30 अक्टूबर 2025 को हुआ था, और इससे पहले ऐसी अवधि जनवरी 1979 में खत्म हुई थी।
पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार (3 नवंबर) को 'एक्स' पर इस उपलब्धि की जानकारी दी और इसे ऐसा 'शून्य' बताया जो बहुत कुछ कह जाता है।
कैसे मिली उपलब्धि
महानिदेशक सिंह ने इसका श्रेय आधुनिक उपकरणों, बेहतर प्रशिक्षण और रणनीतिक योजना को दिया। उन्होंने खास तौर पर घटना के बाद की प्रतिक्रिया का ज़िक्र किया, यानी घायल जवानों को तेज़ी से बड़े अस्पतालों तक पहुंचाना। उन्होंने कहा कि बल इस दौरान भी प्रमुख अभियान क्षेत्रों में लगातार तैनात और सक्रिय रहा।
पीटीआई के अनुसार, सीआरपीएफ का कहना है कि यह उपलब्धि लगातार और तेज़ किए गए अभियानों के बावजूद मिली है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि एक भी जवान या अधिकारी न गंवाना सुरक्षा हालात में सुधार और बल के अपनी गलतियों से सीखने को दिखाता है।
क्यों अहम है
करीब 3.25 लाख जवानों वाला सीआरपीएफ देश की आंतरिक सुरक्षा का मुख्य बल है। इसकी तैनाती तीन बड़े मोर्चों पर है: नक्सल-विरोधी अभियान, जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद-विरोधी अभियान और पूर्वोत्तर में उग्रवाद-विरोधी ड्यूटी। पीटीआई के मुताबिक, आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार अब तक बल के 2,270 जवान और अधिकारी ड्यूटी के दौरान जान गंवा चुके हैं।
इंडिया टीवी के अनुसार, माओवादी गतिविधियां घटने के साथ बल का ध्यान अब मणिपुर की चुनौतियों पर ज़्यादा है, जबकि पहले माओवाद-प्रभावित रहे इलाकों पर भी नज़र रखी जा रही है।
यह आंकड़ा ऑपरेशनल मौतों का है, यानी अभियानों के दौरान हुई मौतों का। पीटीआई की एक रिपोर्ट में इसे 'आज़ादी के बाद पहली बार' बताया गया, जबकि महानिदेशक और प्रधानमंत्री, दोनों ने 47 साल की बात कही है।
