Press Release:Press Information Bureau PIB Backgrounder विकसित भारत- जी राम जी “विकसित भारत - रोज़गार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण)” प्रविष्टि तिथि: 24 OCT 2026 11:56AM by PIB Delhi ग्रामीण रोज़गार और विकास के लिए नई रूपरेखा 'विकसित भारत @2047' के विज़न के अनुरूप, 'विकसित भारत - रोज़गार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण)' (VB-G RAM G) ग्रामीण विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण अहम सुधार है। वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025, पहली जुलाई 2026 से लागू हुआ। इसे देश के सभी ग्रामीण इलाकों में सफलतापूर्वक शुरू किया गया है। महात्मा गांधी नरेगा से वीबी-जी राम जी में परिवर्तन बिना किसी रुकावट या परेशानी के हुआ। इस नई रूपरेखा को लागू करने में सहायक डिजिटल सिस्टम इसकी शुरुआत से ही काम कर रहे थे। यह कानून हर प्रत्येक वित्त वर्ष में 125 दिनों के वेतन वाले रोज़गार की कानूनी गारंटी देता है। यह गारंटी उन सभी ग्रामीण परिवारों को मिलती है जिनके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक कार्य के लिए खुद आगे आते हैं। यह समृद्ध और लचीले ग्रामीण भारत के लिए सशक्तिकरण, विकास, तालमेल और परिपूर्णता (पूरी कवरेज) को बढ़ावा देता है। यह चार मुख्य क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करता है: जल सुरक्षा, बुनियादी ग्रामीण अवसंरचना, आजीविका से जुड़ी अवसंरचना और खराब मौसम की घटनाओं से बचाव। यह अधिनियम तालमेल और परिपूर्णता-उन्मुख नियोजन के माध्यम से समग्र-सरकार' (Whole-of-Government) वाले नज़रिए को संस्थागत बनाता है। इसके केंद्र में 'विकसित ग्राम पंचायत योजनाएं' (वीजीपीपी) तैयार करना है। ये ग्राम पंचायतों की अलग-अलग विकास ज़रूरतों को पूरा करने के लिए एकीकृत ढांचा प्रदान करती हैं। वीजीपीपी के ज़रिए आद्योपांत नियोजन (बॉटम-अप प्लानिंग) की परिकल्पना 'विकसित ग्राम पंचायत योजनाएं' (वीजीपीपी) वीबी-जी राम जी के अंतर्गत प्रमुख संस्थागत सुधार हैं। ये ज़मीनी स्तर पर भागीदारी वाली, सबूत-आधारित, परिपूर्णता-उन्मुख (सैचुरेशन-ओरिएंटेड) और तालमेल-आधारित नियोजन को संभव बनाती हैं। वीजीपीपी ग्रामीण विकास नियोजन में स्थानीय ज़रूरतों को केंद्र में रखती हैं। इन्हें ग्राम सभा और ग्राम पंचायत की सक्रिय भागीदारी से तैयार किया जाता है। ग्राम सभा योजनाओं के लिए ज़रूरी सिफारिश और मंज़ूरी देती है। वीजीपीपी गांवों को अपनी वास्तविक विकास ज़रूरतों, मौजूदा संपत्तियों और विकास की कमियों की पहचान करने और उसी के अनुसार कार्यों को प्राथमिकता देने में सक्षम बनाती हैं। वीजीपीपी प्रक्रिया कैसे काम करती है भागीदारी वाली प्लानिंग: ग्राम पंचायतें ग्राम सभा की भागीदारी से स्थानीय ज़रूरतों के आधार पर कार्यों की पहचान करती हैं और उन्हें प्राथमिकता देती हैं। एसेट मैपिंग: यह प्रक्रिया ग्राम पंचायत के भीतर मौजूदा संपत्तियों, अवसंरचना और सेवा वितरण में कमियों की व्यापक सूची बनाने से शुरू होती है। मौजूदा संपत्तियों की कवरेज: इस सूची में केंद्र और राज्य सरकारों की विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों के अंतर्गत बनाई गई संपत्तियां शामिल होती हैं। जीआईएस-आधारित नियोजन: योजना बनाने की प्रक्रिया में जीआईएस, युक्तधारा, पीएम गति शक्ति और अन्य डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल किया जाता है। भूस्थानिक और गैर-स्थानिक जानकारी स्थानीय ज़रूरतों और मौजूदा संपत्तियों के आधार पर प्रमाण-आधारित और एकीकृत नियोजन में सहायता करती है। अंतर का आकलन (गैप असेसमेंट): इन प्लेटफॉर्म्स से मिली जानकारी स्थानिक नियोजन, बेहतर एसेट मैपिंग और दोहराव से बचने में सहायता करती है। यह अवसंरचना की कमी, विकास की प्राथमिकताओं और संभावित हस्तक्षेपों की पहचान करने में भी सहायता करती है। सरकार के अलग-अलग स्तरों पर तालमेल: वीजीपीपी गांवों के एकीकृत विकास के लिए विभिन्न योजनाओं, विभागों और संबंधित पक्षों के संसाधनों और कार्यों को एक साथ लाकर समग्र सरकार' (Whole-of-Government) वाले नज़रिए को बढ़ावा देते हैं। कई स्तरों पर एकीकरण: वीजीपीपी को ब्लॉक, ज़िला, राज्य और राष्ट्रीय स्तरों पर एक साथ जोड़ा जाता है। ये समेकित योजनाएं 'विकसित भारत राष्ट्रीय ग्रामीण बुनियादी ढांचा स्टैक' में योगदान देती हैं।अनुमत कार्य: वीजीपीपी ढांचा चार मुख्य क्षेत्रों में 318 प्रकार के अनुमत कार्यों की पहचान करता है। वीजीपीपी प्रक्रिया का उद्देश्य रोज़गार से जुड़ी संपत्ति बनाने, बेहतर बुनियादी ढांचे और सरकारी योजनाओं के तालमेल के ज़रिए गांवों के एकीकृत विकास में सहायता करना है। वीबी जी-राम जी: ज़मीनी स्तर पर प्रगति देश में 1 जुलाई 2026 को लागू होने के बाद से 24 सितंबर 2026 तक, वीबी-जी राम जी ने उल्लेखनीय प्रगति की है। सक्रिय कामगार: 2026-27 में 10.88 करोड़ बनाई गई संपत्तियां: 2.83 लाख उपलब्ध कराए गए व्यक्ति-दिवस (काम के दिन): 31.69 करोड़ से अधिक महिलाओं की भागीदारी: 2026-27 में 61.65 प्रतिशत मांग पर कामगारों को उपलब्ध कराया गया रोज़गार: लगभग 2.23 करोड़ ग्रामीण परिवारों से जुड़े 2.81 करोड़ से अधिक लोगों को प्रगति पर कार्य : 97.17 लाख भविष्य की रोज़गार मांग को पूरा करने के लिए मंज़ूर किए गए कार्य: 73.24 लाख सक्रिय कार्यस्थल: लगभग 20.16 लाख देश भर में वर्तमान में काम कर रही ग्राम पंचायतों की संख्या: लगभग 2.31 लाख डीबीटी लेनदेन: 2026-27 में 3.76 करोड़ औसत मज़दूरी दर: 300-450 रुपये प्रति दिन जारी किए गए ग्रामीण रोज़गार गारंटी कार्डों की कुल संख्या: 15.17 करोड़ वित्तीय प्रगति वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को अंतरिम आवंटन के रूप में कुल 93,841 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसमें से, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को पहली किश्त के रूप में 25,880 करोड़ रुपये की मुख्य स्वीकृति ('