Press Release:Press Information Bureau प्रधानमंत्री कार्यालय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने नई दिल्ली में एनडीटीवी वर्ल्ड समिट 2026 को संबोधित किया बदलती वैश्विक व्यवस्था के लिए मजबूत वैश्विक संस्थानों, ग्लोबल साउथ को अधिक प्रभावी आवाज देने और संकट के समय भी अडिग रहने वाले अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता है: प्रधानमंत्रीविकसित भारत केवल अपने लोगों के लिए सिर्फ एक वादा नहीं, बल्कि बेहतर विश्व की गारंटी भी है: प्रधानमंत्रीभारत दुनिया को सशक्त बनाने में योगदान देने के लिए अपनी क्षमताओं को मजबूत कर रहा है: प्रधानमंत्रीभारत अब दुनिया के साथ केवल बैक ऑफिस के रूप में नहीं, बल्कि ब्रेन ऑफिस के रूप में भी सहयोग कर रहा है: प्रधानमंत्री प्रविष्टि तिथि: 22 OCT 2026 9:57PM by PIB Delhi प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली में एनडीटीवी वर्ल्ड समिट 2026 को संबोधित किया। देश में चल रहे उल्लासपूर्ण त्योहारों के वातावरण के बीच अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों का अभिवादन करते हुए प्रधानमंत्री ने समिट में शामिल सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने गंभीर वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श के लिए एकत्र हुए प्रतिनिधियों की सराहना की। एनडीटीवी समिट में हुई चर्चा की सामयिक प्रासंगिकता को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि नई विश्व व्यवस्था को लेकर चर्चाएं आज हर जगह हो रही हैं, क्योंकि वैश्विक बदलाव अब आम नागरिकों के दैनिक जीवन को सीधे प्रभावित कर रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन बदलावों का वास्तविक जीवन पर पड़ने वाला प्रभाव ऐसे अंतरराष्ट्रीय मंचों की आवश्यकता को और बढ़ा देता है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा, “ऐसी स्थिति में, इन वर्ल्ड समिट का महत्व और भी बढ़ जाता है।” ‘द वर्ल्ड बिटवीन आर्डर्स’ (अव्यवस्था और नई व्यवस्था के बीच की दुनिया) विषय को चर्चा के केंद्र में रखते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक समुदाय को इस बात पर गंभीरता से विचार करना चाहिए कि मौजूदा विश्व व्यवस्था में बदलाव क्यों आ रहे हैं और पुरानी व्यवस्थाएं आज के संकटों का समाधान करने में क्यों विफल हो रही हैं। उन्होंने कहा कि इन सवालों के जवाब तलाशने से स्वाभाविक रूप से विश्व पटल पर भारत की विशिष्ट जिम्मेदारियों पर विचार करने की आवश्यकता सामने आती है। श्री मोदी ने कहा, “और दूसरा सवाल यह है कि इस बदलती दुनिया में भारत की क्या भूमिका है?” द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से अंतरराष्ट्रीय संबंधों के स्वाभाविक विकास का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि संयुक्त राष्ट्र की स्थापना इस समझ के साथ की गई थी कि शक्ति के बल पर अपनी बात मनवाने के बजाय संवाद और सहयोग को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। हालांकि, नई अर्थव्यवस्थाओं, प्रौद्योगिकियों और मूल निर्णय-निर्माण प्रक्रिया से बाहर रहे देशों के उभरकर प्रमुखता हासिल करने के बावजूद वैश्विक संस्थान समय के अनुरूप स्वयं को ढालने में विफल रहे। प्रधानमंत्री ने कहा कि कभी देशों को जोड़ने वाले व्यापार, प्रौद्योगिकी और समुद्री मार्ग जैसे माध्यम अब हथियार के रूप में इस्तेमाल किए जाने, संघर्ष और भू-राजनीतिक तनाव के केंद्र बन गए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज की आवश्यकता ऐसी समावेशी विश्व व्यवस्था के निर्माण की है, जो संस्थागत निर्णय लेने की प्रक्रिया और वर्तमान वास्तविकताओं के बीच की खाई को खत्म कर सकें। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने जोर देकर कहा, “और यहीं से भारत की भूमिका का सवाल प्रमुखता से सामने आता है।” कोविड-19 महामारी के दौरान दुनिया में गहरे मतभेदों, आपसी अविश्वास और भरोसे की कमी को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उस समय वैश्वीकरण के समर्थक भी अपने हितों को प्राथमिकता दे रहे थे। प्रधानमंत्री ने उपस्थित लोगों को याद दिलाया कि वर्ष 2020 में जी-20 मंच से उन्होंने मानवता के सामूहिक कल्याण पर केंद्रित एक नई विश्व व्यवस्था के निर्माण का आह्वान किया था। उन्होंने उसी वर्ष संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के मंच से दिए गए अपने संदेश को भी दोहराया, जिसमें उन्होंने संस्थागत व्यवस्थाओं में बदलाव की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया था। श्री मोदी ने कहा, “यदि सदी बदल जाए और हम न बदलें, तो बदलाव लाने की हमारी क्षमता भी कमजोर पड़ जाती है।” उभरती हुई वैश्विक व्यवस्था की रूपरेखा पर सवाल उठाते हुए प्रधानमंत्री ने बहुपक्षीय संस्थानों में सुधार करने और ग्लोबल साउथ की आवाज को उचित स्थान देने की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग केवल अच्छे समय तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि गंभीर संकटों के दौरान भी मजबूती से कायम रहना चाहिए। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा, “इसके लिए सभी स्टेकहोल्डर्स के बीच प्रभावी सहमति बनाना आवश्यक है।” चाणक्य के अर्थशास्त्र का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कमजोर व्यवस्था में ‘मत्स्य न्याय’ की स्थिति पैदा होती है, जिसमें बड़ी मछली छोटी मछली को निगल जाती है। उन्होंने कहा कि भारत का मूल दृष्टिकोण ऐसी वैश्विक व्यवस्था को रोकना है, जिसमें शक्तिशाली देश कमजोर देशों का शोषण करें। इस विचार का ठोस उदाहरण देते हुए उन्होंने कोविड-19 महामारी का उल्लेख किया। उन्होंने याद दिलाया कि जब समृद्ध देश अपने तक सीमित हो गए थे, तब भारत ने आगे बढ़कर 100 से अधिक देशों को टीके और दवाइयां उपलब्ध कराईं। श्री मोदी ने जोर देकर कहा, “दुनिया को ऐसी व्यवस्था की आवश्यकता है, जो मत्स्य न्याय जैसी स्थिति पैदा होने से रोके।” सबका साथ, सबका विकास के मूल मंत्र प
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने नई दिल्ली में एनडीटीवी वर्ल्ड समिट 2026 को संबोधित किया
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