भारतीय नौसेना के लिए बन रहे अगली पीढ़ी के अपतटीय गश्ती पोत (एनजीओपीवी) 'यार्ड 1283 (सृष्टि)' का 27 अक्टूबर को गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (जीएसएल) में जलावतरण हुआ, यानी उसे पहली बार पानी में उतारा गया। रक्षा मंत्रालय की विज्ञप्ति के अनुसार श्रीमती संदीपा सहाय ने पोत का जलावतरण किया। इस मौक़े पर सचिव (रक्षा वित्त) विश्वजीत सहाय और नौसेना, रक्षा मंत्रालय तथा जीएसएल के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

नाम का अर्थ

इन पोतों के नाम भारत की विरासत से लिए जा रहे हैं। 'सृष्टि' संस्कृत का शब्द है, जिसका अर्थ है 'रचना' या 'निर्माण करने की क्रिया'।

ये पोत क्या करेंगे

मंत्रालय के अनुसार देश में ही डिज़ाइन और निर्मित ये पोत मौजूदा गश्ती पोतों की क्षमता बढ़ाएंगे और कई तरह के काम करेंगे:

  • समुद्री निगरानी
  • खोज एवं बचाव
  • अपतटीय संपत्तियों की सुरक्षा
  • मानवीय सहायता और आपदा राहत
  • समुद्री डकैती-रोधी अभियान

पृष्ठभूमि

रक्षा मंत्रालय और दो शिपयार्ड के बीच 30 मार्च 2023 को 11 एनजीओपीवी के स्वदेशी डिज़ाइन और निर्माण का अनुबंध हुआ था। इनमें से सात पोत मुख्य शिपयार्ड गोवा शिपयार्ड और चार कोलकाता की गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) बना रही है। मार्च 2025 की मंत्रालय की विज्ञप्ति के अनुसार ये पोत करीब 3,000 टन के हैं। उसी महीने रत्नागिरी में जीएसएल के दूसरे और तीसरे पोत (यार्ड 1281 और 1282) की कील रखी गई थी।

विज्ञप्ति में 'सृष्टि' को नौसेना को सौंपने की तारीख़ नहीं बताई गई है।