गंगा बाढ़ नियंत्रण बोर्ड (जीएफसीबी) की 19वीं बैठक 27 अक्टूबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल की अध्यक्षता में हुई, पत्र सूचना कार्यालय ने बताया।

बैठक में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी, केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री राम नाथ ठाकुर, नीति आयोग के सदस्य प्रो. के. वी. राजू, बिहार के उपमुख्यमंत्री एवं जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी, उत्तर प्रदेश के जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और गंगा बेसिन राज्यों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

'पुनः भरण' ऐप

बैठक में जल शक्ति मंत्री ने 'पुनः भरण' मोबाइल ऐप लॉन्च किया। इसे राष्ट्रीय जल मिशन के सहयोग से भास्कराचार्य राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुप्रयोग एवं भू-सूचना विज्ञान संस्थान ने बनाया है। यह ऐप भूजल के कृत्रिम पुनर्भरण के लिए उपयुक्त जगहों की वैज्ञानिक पहचान में मदद करेगा।

आयोग का पुनर्गठन

बोर्ड ने गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग के संशोधित कार्यादेश और पुनर्गठन पर चर्चा की। इसमें बेसिन स्तर पर बाढ़ प्रबंधन की योजना, बाढ़ प्रबंधन योजनाओं का मूल्यांकन, नदी की आकृति और गाद से जुड़े अध्ययन और बाढ़ प्रबंधन सूचना प्रणाली का विकास शामिल है। पीआईबी के अनुसार, इससे तालमेल, तकनीकी मूल्यांकन और समय पर फैसले लेने में सुधार की उम्मीद है।

बैठक में जोखिम-आधारित बेसिन मास्टर प्लान बनाने, पुलों के नीचे पानी निकलने की जगह पर्याप्त है या नहीं इसका आकलन करने, परियोजना रिपोर्टों की गुणवत्ता सुधारने और बाढ़ परियोजनाएं समय पर पूरी करने पर भी ज़ोर दिया गया।

क्यों अहम है

गंगा बाढ़ नियंत्रण बोर्ड 18 अप्रैल 1972 को गंगा बेसिन में बाढ़, कटाव और जल निकासी की समस्याओं से मिलकर निपटने के लिए बनाया गया था। इसकी अध्यक्षता केंद्रीय जल शक्ति मंत्री करते हैं और इसमें बेसिन के राज्यों के मुख्यमंत्री या उनके प्रतिनिधि शामिल होते हैं। यही वह मंच है जहां केंद्र और राज्य मिलकर तय करते हैं कि बाढ़ से बचाव के काम कैसे और किस क्रम में हों। बैठक में नदी की बदलती आकृति, जल निकासी में रुकावट और बुनियादी ढांचे से जुड़े मुद्दों पर खास चर्चा हुई।