भारत में बुज़ुर्गों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है। 2011 की जनगणना के अनुसार देश में 60 साल और उससे ज़्यादा उम्र के 10.38 करोड़ लोग थे, और 2036 तक यह संख्या 23 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। ऐसे में केंद्र सरकार की 'अटल वयो अभ्युदय योजना' (अव्यय) बुज़ुर्गों की देखभाल, सेहत और सक्रिय जीवन से जुड़ी कई सुविधाओं को एक छत के नीचे लाती है। पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) ने इस योजना पर एक विस्तृत जानकारी जारी की है।

योजना क्या है

अव्यय 2021 में शुरू हुई। इसने वरिष्ठ नागरिकों के लिए पहले से चल रही राष्ट्रीय कार्य योजना का विलय कर उसका विस्तार किया। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय इसका नोडल मंत्रालय है। योजना के तहत बुज़ुर्गों को भोजन, आश्रय, स्वास्थ्य सेवा और मनोरंजन की सुविधाएं दी जाती हैं, और कोशिश यह है कि वे जहां तक हो सके अपने ही घर और समुदाय में सुरक्षित रह सकें।

पीआईबी के मुताबिक़ 30 सितंबर 2026 को ख़त्म हुई तिमाही में 'वरिष्ठ नागरिकों के लिए एकीकृत कार्यक्रम' के तहत 755 परियोजनाओं के लिए ₹77.98 करोड़ जारी किए गए।

बुज़ुर्गों को क्या-क्या मिलता है

  • वृद्धाश्रम और देखभाल केंद्र: गैर-सरकारी संगठनों, पंचायतों और स्थानीय निकायों को अनुदान मिलता है। अभी 764 वरिष्ठ नागरिक गृहों, 13 सतत देखभाल केंद्रों, 17 सचल चिकित्सा इकाइयों और 3 फिज़ियोथेरेपी क्लीनिकों को मदद दी जा रही है।
  • मुफ़्त सहायक उपकरण: राष्ट्रीय वयोश्री योजना के तहत उम्र से जुड़ी अक्षमता वाले पात्र बुज़ुर्गों को सहायक उपकरण दिए जाते हैं। अब तक 10.45 लाख से ज़्यादा बुज़ुर्गों को कुल 55,87,653 उपकरण मिल चुके हैं।
  • राज्यों के ज़रिये मदद: राज्य सरकारों को देखभाल करने वालों के प्रशिक्षण और मोतियाबिंद सर्जरी के विशेष अभियानों के लिए अनुदान मिलता है।
  • घर पर देखभाल के लिए प्रशिक्षित लोग: 'पीएम-स्पेशल' पहल के तहत देखभाल करने वालों (केयरगिवर्स) को मुफ़्त प्रशिक्षण दिया जाता है।

हेल्पलाइन और ऐप

  • एल्डरलाइन 14567: अक्टूबर 2021 में शुरू हुई यह राष्ट्रीय हेल्पलाइन मुफ़्त जानकारी, मार्गदर्शन और भावनात्मक सहारा देती है, और ज़रूरत पड़ने पर मौके पर जाकर मदद भी करती है। अब तक इस पर 8.66 लाख से ज़्यादा कॉल पर कार्रवाई हुई है।
  • 'जीवन' ऐप: मई 2026 में शुरू हुए इस ऐप में सरकारी योजनाओं की जानकारी, आपात सहायता और वरिष्ठ नागरिक गृहों का ब्योरा है। इसमें एक टैप में ज़रूरी नंबर पर कॉल करने की सुविधा है।
  • 'शतायु' डैशबोर्ड: इससे बुज़ुर्ग और उनके परिवार अपने ज़िले में प्रशिक्षित केयरगिवर ढूंढ सकते हैं। डैशबोर्ड के मुताबिक़ कुल 30,151 केयरगिवर पंजीकृत हैं, जिनमें 23,334 महिलाएं हैं।

बुज़ुर्गों के लिए काम और कारोबार

  • स्कोप (SCOPE): अनुभवी बुज़ुर्गों को उन कंपनियों से जोड़ने वाला पोर्टल, जिन्हें अनुभवी कर्मचारियों की ज़रूरत है।
  • सेज (SAGE): बुज़ुर्गों की देखभाल से जुड़े उत्पाद और सेवाएं बनाने वाले स्टार्टअप को ₹1 करोड़ तक की पूंजी सहायता।

यह क्यों अहम है

शहरीकरण, प्रवासन और एकल परिवारों के बढ़ने से बुज़ुर्गों का पारंपरिक पारिवारिक सहारा कमज़ोर हो रहा है, पीआईबी की जानकारी में यह बात रेखांकित की गई है। ऐसे में यह जानना ज़रूरी है कि मदद कहां से मिल सकती है। किसी भी जानकारी या शिकायत के लिए सबसे आसान रास्ता एल्डरलाइन 14567 है।